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'स्पर्म के बाहर आने को ही मर्द सेक्स समझ बैठता है' : लिपस्टिक अंडर माय बुर्का के बहाने

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- रीतिका रॉय   अलंकृता श्रीवास्तव की नई फिल्म लिप्स्टिक अंडर माय बुर्का हमारे पितृसत्तात्मक समाज के उस  नियम पर चोट करती है  जिसका जिक्र हिंदी सिनेमा में इससे पहले नहीं हुआ । इस फिल्म के मुख्य किरदार भ्रूण हत्या , दहेज , शिक्षा जैसे हक की बत नहीं करती। ये सेक्स से जुड़ी अपनी फैटंसी को लेकर सामने आती हैं। ये हर रोज सपने देखती हैं , लाल लिपस्टिक वाले सपने जिसमें रोजी अपने राजकुमार के साथ सेक्स से जुड़ी फैंटसी को एक अलग मुकाम तक पहुंचा रही होती है , या यूं कहे ऑरगैसम तक पहुंता रही होती है। हां , सही शब्द ऑरगैस्म ही है जिसे हम हिंदी में चरम सीमा से ढ़क देते हैं। रोजी का हर दिन लिपस्टिक वाली किताब पढ़ना और उस किरदार में खुद को ढ़ालना कुछ ऐसा है जो हमारे संस्कारी भारतीय समाज की परिभाषा में फिट नहीं बैठता। इस फिल्म को देखकर हम इसकी वाहवाही जरूर कर सकते हैं कि अलंकृता ने बिल्कुल अलग विषय पर फिल्म बनाई। लेकिन , फर्ज कीजिए किसी दिन आपकी मां , चाची या दादी के हाथों में आप लिपस्टिक वाले सपनों की किताब देख लें तो क्या आप उसी नॉर्मल तरीके इस बात पर प्रतिक्रया दे पाएंगे। जवा...

जर्मनी में जो यहूदियों के साथ हुआ, कहीं वहीं भारत में मुसलमानों के साथ न हो - रवीश कुमार

जर्मनी की तमाम रातों में 9-10 नवंबर 1938 की रात ऐसी रही जो आज तक नहीं बीती है। न वहां बीती है और न ही दुनिया में कहीं और। उस रात को CRYSTAL NIGHT कहा जाता है। उस रात की आहट आज भी सुनाई दे जाती है। कभी कभी सचमुच आ जाती है। हिटलर की जर्मनी में यहुदियों के क़त्लेआम का मंसूबा उसी रात जर्मनी भर में पूरी तैयारी के साथ ज़मीन पर उतरा था। उनका सब कुछ छीन लेने और जर्मनी से भगा देने के इरादे से, जिसके ख़िलाफ़ वर्षों से प्रोपेगैंडा चलाया जा रहा था। 1938 के पहले के कई वर्षों में इस तरह की छिटपुट और संगीन घटनाएं हो रही थीं। इन घटनाओं की निंदा और समर्थन करने के बीच वे लोग मानसिक रूप से तैयार किये जा रहे थे जिन्हें प्रोपेगैंडा को साकार करने लिए आगे चलकर हत्यारा बनना था। अभी तक ये लोग हिटलर की नाना प्रकार की सेनाओं और संगठनों में शामिल होकर हेल हिटलर बोलने में गर्व कर रहे थे। हिटलर के ये भक्त बन चुके थे। जिनके दिमाग़ में हिटलर ने हिंसा का ज़हर घोल दिया था। हिटलर को अब खुल कर बोलने की ज़रूरत भी नहीं थी, वह चुप रहा, चुपचाप देखता रहा, लोग ही उसके लिए यहुदियों को मारने निकल पड़े। हिटलर की सनक लोगों की सन...