'स्पर्म के बाहर आने को ही मर्द सेक्स समझ बैठता है' : लिपस्टिक अंडर माय बुर्का के बहाने
- रीतिका रॉय
अलंकृता श्रीवास्तव की नई फिल्म लिप्स्टिक अंडर माय बुर्का हमारे पितृसत्तात्मक समाज के उस नियम पर चोट करती है जिसका जिक्र हिंदी सिनेमा में इससे पहले नहीं हुआ। इस फिल्म के मुख्य किरदार भ्रूण हत्या, दहेज, शिक्षा जैसे हक की बत नहीं करती। ये सेक्स से जुड़ी अपनी फैटंसी को लेकर सामने आती हैं। ये हर रोज सपने देखती हैं, लाल लिपस्टिक वाले सपने जिसमें रोजी अपने राजकुमार के साथ सेक्स से जुड़ी फैंटसी को एक अलग मुकाम तक पहुंचा रही होती है, या यूं कहे ऑरगैसम तक पहुंता रही होती है। हां, सही शब्द ऑरगैस्म ही है जिसे हम हिंदी में चरम सीमा से ढ़क देते हैं। रोजी का हर दिन लिपस्टिक वाली किताब पढ़ना और उस किरदार में खुद को ढ़ालना कुछ ऐसा है जो हमारे संस्कारी भारतीय समाज की परिभाषा में फिट नहीं बैठता।
इस फिल्म को देखकर हम इसकी वाहवाही जरूर कर सकते हैं कि अलंकृता ने बिल्कुल अलग विषय पर फिल्म बनाई। लेकिन, फर्ज कीजिए किसी दिन आपकी मां, चाची या दादी के हाथों में आप लिपस्टिक वाले सपनों की किताब देख लें तो क्या आप उसी नॉर्मल तरीके इस बात पर प्रतिक्रया दे पाएंगे। जवाब मुश्किल है। हम ऐसे माहौल में रहते हैं जहां कॉडम नाम की चीज हम अपने बैंक के पासवर्ड से भी ज्यादा छिपा कर रखते हैं। अगर किसी ने देख ली तो उसे पता चल जाएगा कि आप सेक्स करते हैं। ये हाल हमारे मर्दों का है।
मान लीजिए आपकी बीवी किसी दिन कॉडम लेकर आती है तो क्या आप उसे ऐसे घूर कर नहीं देखेंगे मानो उसने कितना बड़ा अपराध किया हो। इस फिल्म में भी एक सीन आता है जहां कोंकणा कॉडम खरीदने जाती हैं और दुकानदार को एक पर्ची में लिखकर देती हैं कि उन्हें क्या चाहिए। घर आकर जब वह अपने पति को कॉडम लगाने को कहती हैं तो वह उसे फेंक देता है क्योंकि उसकी नजर में यह उनके काम की चीज नहीं हैं। इस स्थिति में आप अपने आपको कहां पाएंगें। बात कॉडम खरीदने तक ही सीमित नहीं है।
Right to have a say in sex
हमारे यहां महिलाओं का सेक्स में कितना अधिकार होता है। सेक्स सिर्फ वो प्रक्रिया है जहां हमारे मर्द अपना वीर्य (स्पर्म) के बाहर आने को ही सेक्स मान बैठते हैं। याद कीजिए फिल्म का वह सीन जहां शीरीन (कोंकणा) अपने पति के लिए केक लेकर जाती है और बदले में उनका पति उसका हाथ बड़ी बेरुखी से अपने लिंग पर रख देता है। शीरीन की आंखों में आंसु आते हैं पर वह कुछ नहीं कह पाती। यहां हमें शीरीन के लिए हमदर्दी आती है, हम उसके लिए अफसोस करते हैं, घर आकर एक फेसबुक पोस्ट लिखकर अच्छा महसूस करते हैं। इस सीन को आप अपने घर से जोड़ कर देखिए, हर रोज हमारी मां, चाची, बड़ी बहन, भाभी क्या उन सबकी सहमति से उनके पति संबंध बनाते हैं। क्या कभी हमारे घर के मर्दों ने कभी उनकी सहमति लेने की जहमत उठाई होगी। मैरिटल रेप जिसे हमारा समाज अभी तक स्वीकार नहीं पाया है वह हर रोज शायद हमारे घर के बंद कमरों में ही होता है। अगली सुबह वे लाल लिपस्टिक के नीचे रात की घटना को छुपा ले जाती हैं। शीरीन एक सेक्स मशीन है, बिस्तर पर हर दिन उसका शौहर उसका स्विच ऑन करता है और खुद को संतुष्ट कर अलग हो जाता है। क्या एक औरत के अंदर फोर प्ले की ईच्छा नहीं होती होगी. पर हमारे यहां सेक्स में अपनी बात रखना आपको वेश्या का तमगा दिला सकता है। (वैश्या शब्द या उसके काम से भी मुझे आपत्ति नहीं है अगर इसमें उसकी मर्जी शामिल है, वह समाज में इज्जत की बराबर की हकदार हैं, पर अफसोस हम उन्हें यह ईज्जत कभी बख्शते नहीं) हम खुद भी इस नियम में इस कदर ढ़ल चुके हैं कि ईच्छाओं होने के बावजूद हम अपनी बात अपने पार्टनर के सामने रखने में हिचकिचाते हैं। क्या हम कभी रोजी की तरह ये कह पाएंगे की रोजी राजकुमार के नंगे बदन को चूमना चाहती है और खिड़की से राजकुमार को देखकर सोचती है कि वह रोजी की जन्नत को चूमे। यह कोई अश्लीलता नहीं है। यह सिर्फ सेक्स से पहले किए जाने वाले फोर प्ले का एक हिस्सा है।
उम्र और सेक्स की फैंटसी
सेक्स यानि कुछ ऐसा जिसमें जवानी का जोश एक अहम किरदार निभाता है। हमारे यहां सेक्स को ऐसे ही सामने रखा गया है कि सेक्स सिर्फ एक तय उम्र तक आप कर सकते हैं। बुआ जी लिपस्टिक अंडर माय बुर्का का एक ऐसा किरदार जिनके दिल में आज भी उनकी सेक्सुअल फैंटसी दबी पड़ी है जो एक जवान गठीले बदन वाले कोच को देखकर जाग उठती हैं। बुआ जी हर रोज एक किताब पढ़ती हैं लिपस्टिक वाले सपने धार्मिक किताबों के पीछे छिपाकर। हां क्योंकि 50 की उम्र में हम अपने बड़े बुजुर्गों से धार्मिक किताबें पढ़ने की ही उम्मीद करते हैं। उनके हाथों में रामायण या गीता देखना चाहते हैं, उन्हें सत्संग का में शामिल होता देखना चाहते हैं। बुआ जी की किताबें फिल्म में भूचाल लेकर आती हैं क्योंकि उनके परिवार ने आदरणीय बुआ जी से यह घिनौनी उम्मीद नहीं की थी। लिपस्टिक वाले सपने देखने की उनकी उम्र जो ढ़ल चुकी है। जब एक औसत बजट वाली फिल्म इसे हमारे घर की औरतों से जोड़ती है तो हम बिफर उठते हैं। हमारी बुआ जी की सेक्सुअल फैंटसी हो ही नहीं सकती इस ख्याल के साथ हम जी रहे हैं। जिस माहौल में रहते हैं, हमारी परवरिश जिस तरीके से हुई है हमारी बुआ जी का बस ये कहना कि वह रोजी की जगह खुद को रखकर राजुमार के बारे में सोच कर बाथरूम में सबके सो जाने के बाद नल चला कर मास्टरबेट करती हैं। नहीं हमारी बुआ जी ऐसी नहीं हैं!!!!
भारतीय दर्शक निराश करता है
हॉल आधा ही भरा है। ज्यादा भीड़ कॉलेज स्टूडेंट्स की है। यह दर्शकों की भीड़ रत्ना पाठक का बुआ जी के स्विम सूट पहनने पर हंसती है। शीरीन का शौहर जब जबरदस्ती स्ट्रोक लगाता है तो यह भीड़ फिर दबी आवाज में हंस कर मैरिटल रेप को मौन स्वीकृति दे देती है। लीला का बिंदास सेक्स के लिए अपने बॉयफ्रेंड के कमरे पर जाने पर हंस कर यह भीड़ उसे कैरेक्टरलेस मानती है। रिहाना का अपनी दोस्त के बॉयफ्रेंड के साथ रिलेशनशीप में आना उसे अरेस्ट करवा देता है,यानि रिहाना एक अपराधी है भीड़ की नजर में।
हम और आप हर दिन यही करते हैं। जब एक हमारे घर की कोई उम्रगराज महिला बाल रंगवाती है तो हम कहते हैं बुढ़ापे में शौक चढ़ा है। जब कोई ये कहता है कि मां मेरे पति मेरे साथ जबरदस्ती करते हैं तो हम उन्हें याद दिलाते हैं कि वह उनका पति है। जब हमारे आसपास की किसी लड़की के बारे की सेक्सुअल रिलेशन के बारे में सुनते हैं तो हमारी भौंहें तन जाती हैं और हम उसे अपनी सुविधानुसार उसे एक टैग दे देते हैं। अगर कोई लड़की किसी ऐसे लड़के के साथ रिलेशनशिप में आए तो उस लड़के की एक्स या उसके दोस्त उसे सौतन या छीनने वाली के टैग के साथ नवाज देते हैं। हम रोज ये करते हैं इसलिए भारतीय दर्शक को लिपस्टिक अंडर माय बुर्का के हर किरदार पर हंसता है।
हर लड़की की जिंदगी में वह पल जरूर आता है....
जब लाल लिपस्टिक लगाते वक्त वह किसी और के बारे में सोचती है। सेक्सुअल फैंटसी के बारे में सोच कर उसके पेट में तितलियां उड़ती हैं। जब वह अपने बदन को आइने में निहारती है। जब उसके अंदर किसी के स्पर्श की चाह होती है। जब उसका मन अपने पार्टनर से फोर प्ले की चाहत रखता है।
(-रीतिका पटना से हैं और उन्होंने एक बोल्ड विषय पर बेहद जरुरी हस्तक्षेप किया है. ये ब्लॉग नवभारत टाइम्स डिजिटल के ब्लॉग सेक्शन से साभार ली गई है.)
Took me away. Not watched 'Lipstick Under My Burkha' but will watch it soon. This is amongst the best posts I've come across in the recent times.
ReplyDeleteजबरदस्त आलेख। फिल्म के आयाम और खुले।
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