'खोल दो हॉस्टल की हुक' - बीएचयू की 'बदचलन' लड़कियों के नाम एक विद्रोही गीत
तुम कोई कैदी नहीं हो न मुकदमा न गवाही न अदालत न ही कोई फैसला फिर क्यों तुम्हें अपराधियों के भांति करके बंद लगाकर चौकसी ऊंचे दीवारों की तुम्हारे हॉस्टल के गेट पर लटका दिया है लेट एंट्री का कोई थुलथुला ताला तस्वीर साभार - एबीपी न्यूज़ तुम्हारे ख्वाबों के आकाश में चमकने वाले ग्रह-नक्षत्रों को तुम्हारे चन्द्रमा को बताकर अपहरणकर्ता छत की चादर से तुम्हें महफूज आखिर कर दिया है तो क्या बस इसलिए कि पास तेरे सिनेमा से अखबार तक सबमें दिखने वाली अप्सराओं की तरह उनमुक्त केश मादक नयन सुर्ख अधर उभरे उरोज लचकती कमर प्रमत्त चाल से बनी एक देह हैं तस्वीर साभार- एनडीटीवी या बस इसलिए कि पास तेरे सोने चांदी की बालियां, कंगन, खनकती चुड़ियाँ हैं या कि शायद इसलिए कि पास तुमने कपास के खेतों से निकली रूई के फाहों से निर्मित श्वेत सैनेटरी पैड, ब्रा ब्लॉउज जैसा रहस्यमयी पोशाक रखा है तो फिर तुम छोड़ क्यों नहीं देती निकल क्यों नहीं जाती चुड़ियों के वृत से पोशाकों के चित्र से स्त्री के चरित्र ...