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Showing posts from 2015

कुराइच से जुड़ा बालमन

केतारी (ईंख — वैसे हमारे यहाँ ऊंख कहते हैं), ठेकुँआ, घाट, नए कपड़े, रात को लूडो खेल-खेलकर जागना, घाट पर पटाखें फोड़ना, नानी का दुलार वैगेरह वैगेरह. बालमन छठ को भी कई तरीकों से याद रखता है। लोकपर्व में अपने हिस्से की आस्था तलाशता है. आज भी याद आता है स्कूल से हॉफ डे लेकर पापा के साथ गया-डेहरी पैसेंजर से सासाराम पहुँचता था, खरना के दिन. माँ चित्रगुप्त पूजा के अगले दिन ही छठ के लिए नानीघर चली जाया करती. माँ और नानी छठ करतीं थीं. माँ चेहरा देख लेती तो उसे लगता जैसे उसके छठ का प्रायोजन पूरा हो गया. खरना का प्रसाद खाते, नानी अपने नाती को दो केला एक्सट्रा ज़्यादा देती, नानी और माँ दोनों के पैर दबाते, पैर दबाते हुए अच्छे से पढ़ने की नसीहतें दी जातीं हमें.  अगले दिन के उत्साह का कारण होता नहर पर जाना. बच्चे दोपहर के खाने के बाद से ही पूछने लग जाते कि पापा कितने बजे चलेंगे नदी पर, बहुत देर हो रहा है — हमारे लिए मेला हुआ करता. हमारा नहर कुराइच था. किस नदी से काटकर वह नहर बना था, इसकी न मुझे आज जानकारी हुई, न जानने की कभी कोशिश की.. क्रीज वाले कपड़े एकदम जा-झाड़ के टाइप पहनकर, बाल संवारकर तैयार...

"Manufactured Rebellion" holds no substance : RTI reveals

Writers, Artists and Filmmakers have been returning their national awards in lieu of growing religious intolerance in the country. There may be controversy regarding their decision or what more good  possible ways of protest could have been but the reiterated backfire on writers for their selective approach calling it as the "manufactured" rebellion or "politics by other means" seems to hold no reasonable substance after  response to a RTI plea by Ministry of Home Affairs (MHA) on communal tensions. A RTI was filed in Ministry of Home Affairs by Rohin Kumar, Political Science student at University of Delhi seeking information on number of cases of communal tensions that  erupted in country in last one year till date. In its reply MHA, has provided the details of communal incidents occurred, state-wise, during 2014 & 2015 (up to May). The figures itself speaks louder than the political satires plus also backs the ongoing symbolic protest of returning awards. ...

आबरु की आड में बीमार होता शरीर:: ब्रेस्ट सिर्फ कामुकता जागृति नहीं स्वास्थ्य का भी विषय है

है तो शरीर का अंग ही पर शरीर में होते हुए भी शरीर से जुदा. दूसरों की नजरों का आकर्षण खुद की आँखों से महरुम. घातक बीमारी की  दस्तक के बावजूद विमर्श का माहौल तैयार कर पाना बेहद मु...

बाजार की संस्कृति : मोबाइल पर सिकुडता मार्केट

बाजार की संस्कृति : मोबाइल पर सिकुडता मार्केट अॉफर किसे बुरे लगते हैं, कौन नहीं लाभ लेना  चाहता आखिर हमारे लिए ही तो हैं! ग्रोसरी, ड्रैसेस, होम एप्लाइंसेस, अॉटोमोबील, इलेक्ट...

Was back, Unchanged

I got your hands without asking for it. holding me back, melting me down. This I never felt before, in the world with me around. You seep deep into my blood Getting me so indulged. I find in you, the power of rain, the ease, washing my pain. The struggles I made in the sands of desert You walked with me, the journey now a feathered treasure. I stood alone clouded and dark You were the sun, bright and warm. Smiling we lived,live's called pleasure. These blue-blacks to me dealt in another measure. You were the light in my darkness balming me in my aches. And now when I grow weak, I find you again, the same. -Priyadarshni, Sanya Freelancer, BHU

गजेंद्र चौहान के नाम खुला पत्र

माननीय महोदय, पत्र में कुछ भी लिखने से पहले मैं अपना परिचय लिख देता हूँ,बस दो-चार लाइनों में ही। स्कूल में शॉट प्ले के लिए चुना गया लक्ष्मण का किरदार निभाया,छठ्ठी या सातवीं म...
सेवा में, नरेंद्र दामोदर दास मोदी प्रधानमंत्री,भारत विषय: मन की बात इसपर आपकी नहीं मेरी। महोदय, मैं इस देश का एक अदना सा लडका हूं जिसे आपसे मुहब्बत तो नहीं हाँ,पर आपसे कोई नफर...

आईपीएल का ललित खेल: कहीं चियरलीडर्स भी तो फिक्स नहीं हैं न...

देश का धर्म क्रिकेट और महापर्व आईपीएल। जिस दिन से शुरु होता है बच्चे,बूढे सब सेट मैक्स में घुस जाते हैं। हर चौके छक्के पर चियरलीडर्स के साथ ही कमरिया ठुमकाते अपने टीम को चिय...

मिडीया मंथन

दुनिया के सबसे बडे लोकतंत्र में पत्रकारों की संदेहास्पद मौत एक गंभीर चिंता का विषय है। हैरत की बाद यह की इसके बावजूद पत्रकारिता जगत में कोई खास बेचैनी नहीं दिखती। इसकी सब...

बीमार स्वास्थ्य ढांचा

रोटी,कपडे और मकान के साथ-साथ स्वास्थय किसी भी देश के नागरिकों के लिए बेहद जरूरी है। बेजा विकास के बहते बयार में चिकित्सा एवं दवाओं पर बढते खर्च के बीच जरुरत है कि हुकुमतें स...