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सांप्रदायिक बुनियाद के बीच तर्क इस्लाम का अभ्यास

  -इश्तेय़ाक अहमद उस वक़्त मेरी उम्र कुछ 8-9 बरस रही होगी। बचपन ढेरों बच्चों की सोहबत में गुज़र रहा था। कुछ ख़ानदान के थे, कुछ पासपड़ोस के। एक तरफ़ काफ़ी तवील ख़ानदान और दूसरी तरफ़ माँ-बाप के साथियों-दोस्तों के गहवारे। माली तंगी के बावजूद ख़ुद को कभी बेचारा या कमज़ोर महसूस नहीं किया, शायद लड़का होने की वजह से।     ख़ैर, उस दिन हमसब, कुछ 7-8 बच्चे कुएँ के पास के करौंदे की घनी झाड़ के पास बने हौज़ की दीवार पर बैठे गपिया रहे थे। धूप काफ़ी तेज़ थी, पर तब गर्मी कहाँ महसूस होती थी। गुलाबी-सफ़ेद खट्टे करौंदों की आख़िरी खेप भी ख़त्म हो चुकी थी। बस इक्के-दुक्के वही फल बचे थे जो कंटीली झाड़ी के बिल्कुल अंदर में थे और कोई भी उनतक पहुँचने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहा था। लाल चींटियों की एक लंबी क़तार हौज़ के एक कोने में चढ़ उतर रही थी।     "लाल चींटी हिन्दू होती है" - हमसे कोई दो बरस छोटे एक लड़के ने कहा। लगभग उसी उम्र की एक लड़की ने जोड़ा - "लाल चींटी ज़ोर से काटती है। काली चींटी मुसलमान होती है, कभी काटती नहीं।"     मेरे घर पर रिश्तेदारों के अलावा आनेवाले लगभग सभी लोग हिन्दू होते ...

ओ! मई 2019, नफरत की हवा बदल दो

मुझे 2019 मई का इंतजार है. लोकसभा चुनाव से बहुत उम्मीदें हैं. हां, राजनीतिक उम्मीदें ही हैं क्योंकि शायद पहली बार राजनीति ने घर-परिवार के भीतर दीवार खड़ी कर दी है. निजी जीवन प्रभावित हो चुका है. ऐसा नहीं है कि मुझे  कांग्रेस या किसी विपक्ष से  बहुत ज्यादा उम्मीदें हैं. बतौर पत्रकार जिम्मेदारी सत्ता से सवाल करने की है. वह बताने की है जो वे छिपाना चाहते हैं. पर आज मैं क्या हम सब एक ऐसे मुहाने पर खड़े हैं जहां हमारे रिश्ते नफरत की राजनीति से प्रभावित हैं. चाहकर भी मैं उसे अनदेखा नहीं कर पाता. परिवारों और रिश्तों के बीच राजनीति ने नफरत बो दी गई है. ये भाजपा-संघ की फेक/फॉल्स न्यूज़ पर सवार आक्रमक राजनीति का नतीजा है. मैं उसका पीड़ित हूं. मैं अपनी नानी वापस चाहता हूँ. मामा वापस चाहता हूं. चचेरे/मौसेरे भाई वापस चाहता हूं. चूंकि मैं सवाल करता हूं, वो मुझे कम्युनिस्ट समझते हैं. उनके लिए कम्युनिस्ट होने का मतलब देशद्रोही होना होता है. कभी वे मुझे मैं प्रो-कांग्रेस, कभी प्रो-केजरी कहते हैं. वे मुझे हर उस खांचे में डालते हैं, जो भाजपा और संघ  के एजेंडे के खिलाफ है. 2013-14 के साल...