बजट चकल्लस - टू

बजट होता है बेहद जटिल. कहने में कोई दोमत नहीं की इसकी जटिलता ही इसकी विशेषता है. इस वर्ष मतलब 2016-17 के बजट कि बात करें तो कुल राशि है 19.78 लाख करोड़. अब इस राशि को फाड़े-फाड़ समझते हैं कितना पैसा कहाँ आंवटित किया गया.

जैसा वित्तमंत्री अरूण जेटली ने अपने संबोधन में कहा कि भारत को रूपांतरित करने वाले इस बजट में नौ स्तंभ तैयार किये हैं तो जरूरत महसूस होती है कि इन स्तंभों की संरचना की पड़ताल होनी चाहिए..

1. कृषि एवं कृषक उत्थान

भले राहुल गाँधी पप्पू हों लेकिन 'सूट-बूट  की सरकार वाला पंचलाईन असर दिखता हुआ लगता है. अलग सी बात है रागा के राग इतने सिरीयसली न लें आप. फिर यूँ समझिए कि मोदी लहर की वैलिडीटी खत्म हुई, प्रशांत किशोर ने पाला बदला, 44 खांग्रेसी मासूम एनडीए गठबंधन पर भारी पड़ने लगे, चुनाव हारने लगे तो अकड़ ठिकाने आ गई. आखिरकार, नमो लिखा सूट पहनकर खेत-पतवार में घुसना ही पड़ा. वैसे, वित्त मंत्री ने ये सब नहीं बोला. वैश्विक अर्थव्यवस्था की सुस्त चाल में भारतीय अर्थव्यवस्था सुस्त ना पड़े इसके लिए ग्रामीण भारत में

इस स्तंभ के लिए कुल 35,984 करोड़ का आंवटन किया गया है. एकमुश्त सुनने में यह रकम बहुत बड़ी लगती है. लेकिन इसमें झांकने पर पता लगता है कि इस रकम में से 15,000 करोड़ फसल बीमा सब्सिडी के नाम पर वित्त मंत्रालय से कृषि मंत्रालय को हस्तांतरित किया गया है. मतलब अब बचा 20,984 करोड़. तो अखबारों के 128% कृषि बजट में बढ़ोतरी वाली हेडलाईन महज 25% बढ़ोतरी पर ठहर जाती है. जिस देश की 55% आबादी खेती पर निर्भर हो, लगातार तीन वर्षों से सूखा झेल रहा हो, औसतन 52 किसान हर रोज़ आत्महत्या कर रहें हों वहाँ ये एकमुश्त पैसा दिखाकर सुर्खियां बटोरने जैसा प्रतीत होता है.

जैसे मान लीजिए, हॉस्टल में रहने वाला लड़के को 6000 रूपये महीनवारी आते हैं. इस बार इंट्रेंस फॉर्म के नाम पर दो हजार रुपये अतिरिक्त मिले माने टोटल 8000 रूपये. अब बाबूजी ढ़िंढोरा पीट रहे हैं हमने तो लड़के को 8000 रूपये दिया. लेकिन बाबूजी ये नहीं बता रहे हैं कि लड़के के खाने में अभी भी आलू का भूजिया-पनछोछर दाल ही है, मिन्यू में कोई पनीर नहीं जुड़ गया!

सबसे बड़ी बात है कि किसानों की आमदनी 2022 तक दुगनी हो जाएगी. सुनने में ऐसा लग रहा है जैसे सातवें आय कमिशन की सिफारिशें किसानों पर लागू कर दी गई है. दुगना करने के पहले ये जानना जरूरी है कि किसान की आमदनी आखिर है कितनी? इतना तो पक्का है न, ग्रेड सी या डी कर्मचारी की तरह 20,200 रूपये वाला ग्रेड पे नहीं है किसानों का! राष्ट्रीय सैंपल सर्वे के अनुसार देश के 17 राज्यों में मध्यम दर्जे किसान की सलाना आमदनी 20,000 रूपये है. मतलब, 20,000/12= 1666 रूपये/माह.

येस डियर फ्रेंड, पैकेज ऑफ 20,000 के(K)! इससे दस गुना ज्यादा बेहतर पैकेज दिल्ली में 'घर बैठे काम करें' वाले इस्तेहार देते हैं! अब, बात हैं इसी 1666 को दुगना करने की. मतलब पाँच साल में कितना कर दिया? 3332 रूपये. अब हम कुछ नहीं कहेंगें आप ताली बजायें या माथा पीटें! तुरंत संबित पात्रा आपसे ही पूछ लेंगें- कांग्रेस से हिसाब क्यों नहीं पूछा? पैंसठ साल में कांग्रेस ने देश की दुर्गति कर दी और आप दो ही वर्ष के बजट में कायाकल्प खोज रहे हैं? आई मीन, सच पूछिए तो ये वाला तर्क संबित अगले पचास साल तक चला सकते हैं फिर भी पंद्रह कम ही पड़ेंगें. वैसे है दूरदर्शी तर्क!

अब जरा बताईए, सार तहिने वोटवा मारे पाँच साल ला.. बजट होता है एक साल का सरकारी खर्चा-पानी..अब इ सपना देखा रहिन हैं 2022 का..कुछ ज्यादा ही आँखिया दूर तक नहीं देख रहा है? खैर, हमलोग को दूरदर्शिता थोड़े ना दिखेगा इ सब पॉलिसी मेकर बाबू लोग के हिस्से का चीज है.

आगे किसान उत्थान में क्या मिला, जरा सुनिए..प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के मद को 2600 करोड़ से बढ़ाकर 5500 करोड़ कर दिया गया. जी, टर्म्स एंड कंडीशन एप्लाई. बजट भाषण में प्वाइंट नंबर 31 में बस इतना ही लिखा है इसलिए बेनीफिट ऑफ डाउब्ट में उम्मीद की जा सकती है कि रेडियो-टीवी पर राजधानी की स्पीड से भागते शर्तें लागू वाला कॉलम थोड़ा स्थिर से सुनाया जाएगा, हस्ताक्षर के पहले. दलहन विकास के लिए 500 करोड़. 674 कृषि विज्ञान केंद्रों में गुणवत्ता हेतु प्रतिस्पर्धा करवायी जाएगी जिसके लिए 50 लाख की कुल पुरस्कार राशि रखी गई है. प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना में 19,000 करोड़. वैसे, एनडीए की सरकार सड़क तेज बनाती है चाहे अटल बिहारी वाली रही हो या अभी वाली.

प्वाइंट नंबर 29 है कि, प्राकृतिक आपदा में फसलों के नुकसान बाद किसानों को कैसे बेहतर मदद की जाये इस बाब़त सरकार नेशनल डिज़ास्टर रिस्पॉन्स फंड में कुछ बदलाव लाएंगी. क्या फिल्हाल नहीं पता! इसके साथ ही किसानों को अलग कार्यों में भी लगाया जाएगा ताकि उनकी पारिवारिक आय में वृद्धि हो. जैसे- उन्हें मत्सयापालन, गौशाला वैगेरह में निपुण बनाया जाए. इसके लिए 850 करोड़ का प्रावधान है. गर ढंग से लागू किया जाये तो किसानों के हीत में बेहतरीन कदम साबित होगा.

2. ग्रामीण क्षेत्र

चौदहवें वित्त आयोग के सिफारिशों के अनुरूप कुल 2.87 लाख करोड़ ग्राम पंचायतों व नगरपालिकाओं को दिये जायेंगे. मतलब औसतन 80 लाख रूपये हर ग्राम पंचायत को और लगभग 21 करोड़ रूपये प्रत्येक नगर निगम व नगरपालिकाओं को. बजट में फिल्हाल ये स्पष्ट नहीं बताया गया है- क्या गया नगर निगम और बृहंमुंबई नगरपालिका दोनों को 21 करोड़ ही दिये जाएंगें? पंचायती राज मंत्रालय राज्य सरकारों से इसपर विमर्श कर रुपरेखा तैयार करेगी. वैसे, गर ईमानदारी से एक ग्राम पंचायत में वास्तविक आंवटित राशि लगा दी जाये तो पूछिए मत! दिन दोगुना रात चौगुना जैसी बात हो जाएगी. लेकिन, इसके लिए चाहिए होगा- भ्रष्टाचार से आजादी...लूट-खसोट की मानसिकता से आजादी....

आगे बवाल है मनरेगा पर. इस वर्ष इसपर आवंटित किया गया है कुल 38,500 करोड़ रूपये. सरकार इसे ऐतिहासिक बताती है. वैसे ऐतिहासिक नहीं तो भौगोलिक तो है ही. मनरेगा ने सरकार जी का दिमाग जो उनकी धुरी पर घुमाया. कभी इसे कांग्रेस की सबसे बड़ी विफलता बताया अब उसी को खिंचकर सफल बनाने में लगे हैं. अच्छा है लेकिन पाँच पर्सेंट ही सही क्रेडिट कांग्रेस को भी दीजिएगा. वैसे, सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि ये रकम नाकाफी है, 50,000 करोड़ रूपये की जरूरत होगी. तर्क़ की अभी पिछले वर्ष मनरेगा स्कीम में रोजगार पाने वालों हजारों को दिहाडी नहीं मिल पाई है. रोजगार के दिन महज 38 दिन पर सिकुड़ गए हैं. वैसे मनरेगा का ये आवंटन पिछले वर्ष के 34,500 करोड़ से ज्यादा तो है ही.

एक मई 2018 तक देश के सभी गाँव को बिजलीकृत करने का लक्ष्य है. इसके लिए दिन दयाल उपाध्याय ग्राम ज्योति स्कीम को 8500 करोड़ रूपये आवंटित हुए हैं. ये अलग बात हैं अभी शहरों को चौबीस घंटे बिजली नसीब नहीं होती और अभी ही सवाल दाग देना कि गाँवों को कितने घंटे बिजली मिलेगी उचित नहीं होगा. आखिर, खंभे लगेंगें गोबर गैस के इतर सीएफएल-एलईडी चमकेगी भले थोड़े ही देर क्यों ना, पहुँचेगी तो सही!

ग्रामीण भारत में स्वच्छ भारत अभियान के लिए 9000 करोड़ का प्रावधान है. खुले में शौच से आजाद ग्रामीण भारत करने की योजना है. सरकार ने इसे बढ़ावा देने के लिए खुले में शौच से आजाद गाँवों को सब्सिडी देने के प्रावधान किया है. अब रामप्रवेश हमसे पूछिन- भईया, जरा ई बताईं कि सरकरवा इ कइसे तय करिहन कि कौन गाँव खुल के खुलासा पखाना से आजाद बाटे? मने कोई डीएम-एसडीएम तय करी त करी कइसे? कौनो बाहर से आकर हमार गाँव में हग देलस त हमार गाँव त इ सब्सिडी से ही आजाद हो जाई! कौनो वैज्ञानिक पद्धति जरूरी बाटे पता लगावे कि कौन सा रंग नदिया उ पार के ह और कौन हमनी के! सरकार अपने से इ काहे ना पूछेलन की लोग बाहरी शौच करे काहे जा ताड़न? हमनी के रऊआ एइसन सब्सिडी से आजाद करीं. माई-बाप शौचालय बना के दे दिहीं.

और इस स्तंभ के अंत में एक नए कार्यक्रम की शुरुआत की बात कही गई है. नाम है- राष्ट्रीय ग्राम स्वराज अभियान। आवंटित राशि-655 करोड़. उम्मीद कीजिए 15 अगस्त या गाँधी जयंती को प्रधानसेवक जी आँखें नम किये गाँधी के ग्राम स्वराज की संकल्पना पर एक इवेंट करेंगें. वो अलग बात है, कुछ जने गोडसे पूजते हैं. वैसे, अफजल भी तो पूजे जा रहे हैं न! खैर, बात दूर तलक जानी चाहिए बजाय कि एक दूसरे के कृत्य को जस्टिफाई करने पर पिल पड़ें.

3. सामाजिक क्षेत्र व स्वास्थ्य

अरूण जेटली की शुरुआत हुई विवेकानंद के उक्ति से, अंग्रेज़ी में ही लिख देता हूँ- 'No amount of politics would be of any avail until the masses in India are well educated, well-fed and well cared for.' हम तो ये लाइन लिखते-लिखते ही लाजबाव़ हो गये. अब इसका जब़ाव आप खुद ही दे लीजिए- कितने लोग इस देश में अनपढ़, बच्चे कुपोषित, भूखमरी के लपेटे में, झुग्गीयों में जीवनयापन करने वाले हैं? मतलब, विवेकानंद के लाइन से ही समझें तो ग्रेटर नोएडा में मैकेनिकल इंजीनियरिंग पढ़ रहा कमल ठीक ही कहता है- "वाट् द फक़ इज़ दिस पॉलिटिक्स!" बंगलुरू से फैज़ी भी सही है- 'घंटा पॉलिटिक्स, आई हेट इट.' ये शब्द कतई विवेकानंद के नहीं हो सकते लेकिन सरकारों से मोहभंग का कारण उनकी सामाजिक सुरक्षा देने में विफलता की ही कहानी है इन युवाओं की जुबानी में.

आगे, एलपीजी गैस सिलेंडर को गरीबी रेखा से नीचे वालों तक पहुँचाने के लिए 2000 करोड़ रूपये आवंटित हुए हैं. लड़की या कोयले के चूल्हे का धुआं 400 सिगरेट प्रति घंटें जलने के बराबर है. भाईसाहब, इतना खतरनाक था तो और पहले देते न! जब़ाव आया- कांग्रेस की सरकार थी. वो ये सब पैसठ साल में ना सोच सकें हमने दो साल के भीतर सोचा. रामप्रवेश कहिन- सरकार काम त करा ता मर्दे! कोई पीछे से कह बैठा- अरे कोई तब कोई आवार्ड वापस काहे नहीं किया जब खांग्रेसी हमारी माँ-बहनों के फेफड़ों में धुआं भर रहे थे?....और माँ भारती के जयकारे लगने लगें. बीच-बीच में खांग्रेसियों के माँ-बहनों को गालियां भी दी गई! खैर,

वित्तमंत्री ने उन पच्हत्तर लाख मध्यम वर्ग परिवारों को बधाई दी गैस सब्सिडी छोड़ी. इस तरह सब्सिडी त्यागने की अपील करने वाले पहले प्रधानमंत्री बने नरेंद्र मोदी और पहले नागरिक हुए वो जिन्होंने सचमुच में स्वचेछा से त्यागा. हमारी भी बधाईयाँ. साथ में गलती से सब्सिडी छोड़ देने वालों के साथ सहानुभूति भी.

गरीब परिवारों को एक लाख रूपये का स्वास्थ्य बीमा दिया जाएगा और वृद्धों को अतिरिक्त 30,000 रुपये का पैकेज. अब एक सिनियर हैं आदित्य, जेएनयू से एमफिल कर रहे हैं उन्होंने बीमा की बात सुन-सुनकर कहा- दरअसल, सरकार नहीं बाजार चला गाँव की ओर. रामप्रवेश टपक पड़े फट से मुँह खोलिन और कह दिया -'जेएनयू के लइका से उम्मीदे का करीं! सब वामपंथी बाड़न, सरकार के पइसा पर पढ़ी और सरकारे के गरियाई! अभी हेतना कांड हो गईल होइज़ा...' कहते हुए आंख लाल होते देखा तो रंगीन बात फेंक दिया -'हटाईं उ सब बात, इ बताईं की सुगनी जोरे पिछले दिने सरसों के खेत में देखलीं रअउआ के, फगुआ चढ़ गईल का जी?' लजा गए रामप्रवेश, ठंडें तो हुए. हम सोचते रहे- मास्टर इलेक्ट्रॉनिक मीडिया और खासकर अंग्रेज़ी मीडिया के राष्ट्रीय होने पर सवाल उठाते हैं. हमको भी लगा अर्णब को शेरघाटी-पलकिया में कौन सुनता होगा लेकिन अर्णब दिखे चाहे ना दिखे, वैसे  वाले तर्क नीचे तो पहुंच ही रहे हैं.

नेशनल डायलिसीस सर्विस प्रोग्राम की शुरुआत होगी. फंड पीपीपी मॉडल के राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के अंतर्गत जुटाये जाएंगें. ये मॉडल कितना सफल है भारत में गूगल कीजिएगा, दिल्ली मेट्रो के अलावा कोई नया सफल उदाहरण हो तो सूचित करें.

अनुसूचित जाति व जनजाति की महिलाओं में उद्योग (entrepreneurship) बढ़ावा देने के लिए 'स्टैंड अप इंडिया स्कीम' के अंतर्गत 500 करोड़ का प्रावधान है. बाबा साहेब अंबेडकर की 125वीं जयंती के अवसर पर शुरू किया जाएगा. हाँ, एक और इव़ेंट! एक महिला बुदबुदाई - रोहित वेमुला आत्महत्या करने पर मजबूर किया गया. सोनी सुरी पर हमला हुआ है. जल-जंगल-जमीन के संघर्ष को नक्सली-वामपंथी-विकास विरोधी कहकर खारिज किया जा रहा है. बस्तर में पुलिसवाले महिलाओं के स्तन दबा पता लगा रहे हैं कौन शादीशुदा है कौन नहीं. कोई मीडिया इसको रिपोर्ट नहीं कर रहा.(ये बात स्वामी अग्निवेश ने राज्यसभा टीवी के सेमिनार में बताई). मेरी नजरें झुक गई. लिखते हुई भी रोंगटे खड़े हो रहे हैं. इन्हें उद्योग में बढ़ावा देना बहुत अच्छा है सरकार जी लेकिन सामाजिक सशक्तिकरण भी बहुत जरूरी है. ये कैसी माँ भारती के नारों के बीच जीने की आदत डालने लगने हैं हम!

4. शिक्षा, कौशल विकास व रोजगार सृजन

शिक्षा

सबसे पहले शिक्षा की बात करते हैं. अगले दो साल में 62 नवोदय विद्यालय खोले जाएंगें. दस सरकारी एवं दस प्राइवेट उच्च शिक्षण संस्थानों को विश्वस्तरीय बनाया जाएगा. कैसे-क्या होगा ये नहीं बताया गया है फिल्हाल. हेफा (हाईयर एजुकेशन फाइनेंसिंग एजेंसी) की स्थापना होगी जो उच्च शिक्षण संस्थानों को डोनेशन देगी. इसकी विस्तृत जानकारी अभी नहीं है. अंत में एक सुचारू व्यवस्था बनाने की कोशिश है. प्रावधान है कि स्कूल-कॉलेज की डिग्री और अन्य जुड़े दस्तावेज को डिजिटल किया जाएगा. इसे बेहद सुरक्षित और सुगम व्यवस्था के रुप में विकसित किया जाएगा. प्रथमदृष्टया तो बेहद अच्छा आइडिया लगता है लेकिन वास्तविकता में होते देखना होगा.

इधर शिक्षाविद् और भी शहरों में डीयू-जेएनयू-एम्स वैगेरह की माँग कर रहे हैं और उधर सिर्फ़ नवोदय में फुसलाया जा रहें हैं बाबू लोग. सोचते हैं कि आने वाले पीढ़ी को मेरी तरह जद्दोजहद में विस्थापित जीवन, दाखिले के लिए मारामारी ना करना पड़े लेकिन ये उन्हें कहाँ मंजूर. इतने लाख लोग गैस सब्सिडी छोड़ दिए एक प्रधानमंत्री के अपील पर अब कोशिश है कि नीति ही ऐसे बनाये जाएं कि खुद-व-खुद आप लवली प्रोफेशनल से पॉलिटिक्ल साइंस की डिग्री लें. ओ सॉरी, नॉट पोल साइंस आई मीन बीबीए एंड बीसीए लाइक समथिंग.

कौशल विकास

प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना के अंतर्गत 1500 कौशल विकास केंद्र 1700 करोड़ रूपये में खड़े किये जाएंगे. एक करोड़ युवाओं का कौशल विकास की योजना है. आटीआई और वोकेशनल ट्रेनिंग सेंटर में ऑनलाइन कार्यक्रम चलाये जाएंगें.

रोजगार सृजन

एक कहानी है मनरेगा, दूसरी गरीबी रेखा के नीचे वालों को गैस कनेक्शन इनसे भी रोजगार सृजन ही होगा. कितने सारे एसएससी, रेलवे एवं अन्य सरकारी वैकेंसी निकलेंगी इसका कोई नंबर नहीं है. आप वैसे पारामाऊंट, चाणक्य में करोलबाग, मुखर्जी नगर करते रहिए. ऑल द बेस्ट.

सरकार कह रही है खुदरा बाजार बड़ा सर्विस सेक्टर है. इसमें बहुत अवसर हैं गर नियमों को थोड़ा सरल किया जाएं. वित्त मंत्री सदन में पूछते हैं- 'गर शॉपिंग मॉल सातों दिन खुले रह सकते हैं तो क्यों नहीं छोटे-मध्य दुकान भी?' जबाव़ देते हैं रामप्रवेश- 'अरूण चा छोटा दुकान त खुलबे करता है एतबार को. हम तो जीजाजी के लिए संडे का छुट्टी मांग रहे थे! रामप्रवेश के जीजा मॉल में कार्यरत हैं, सातों दिन आठ घंटें. फैमिली को टाइम नहीं दे पा रहे. खैर, वित्तमंत्री कामगारों के हितों की रक्षा की बात भी किये थे. बात करने में बुरा भी क्या है!

5. आधारभूत ढांचा व निवेश

रोड़ और हाइवे के लिए 55,000 करोड़ रूपये. नेशनल हाईवे ऑथिरीटी ऑफ इंडिया मुचलकों से करीब 15,000 करोड़ की उगाही करेगी. प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना को भी मिला दें तो टोटल हुआ 97,000 करोड़ वर्ष 2016-17 के लिए. Kudos गड़करी जी. सड़क का पैसा सड़क पर लगे तो सड़क चमक जाये. बस, निगरानी रखिएगा. आपके विभाग को 2015 में सबसे जल्दी और अबतक वर्ष में सबसे ज्यादा किलोमीटर सड़क बनाने के लिए पुरस्कार भी मिला. बधाईयाँ.

मोटर वेहिक्ल कानून में पर्यावरण संबंधी संसोधन किये जाएंगें. बंदरगाहों व हवाई अड्डों का विस्तार होगा. एलईडी बल्ब को बढ़ावा दिया जाएगा. परमाणु संयंत्र के लिए के लिए 3000 करोड़ सलाना निवेश होगा. फूड प्रोसेसिंग इंडस्ट्री में सौ फीसदी विदेशी निवेश लाया जाएगा. कहते हैं किसानों को इससे फायदा होगा, रोजगार सृजन होगा. भला कैसे? आसान भाषा में समझाइएगा, इकोनोमिक्स नहीं पढ़े है न!

पब्लिक उटिलीटी बिल लाया जाएगा जिससे की पीपीपी व जुड़े अन्य विवाद जल्दी निबटाये जा सकें. कुछ ऐसे क्षेत्र खोजे जाएंगें जिससे या जिसमें उत्पादन की क्षमता हो. इसके लिए शोध की जरुरत होगी. बाई द वे, #OccupyUGC वाले आंदोलन का क्या हुआ?

6. वित्तीय क्षेत्र में सुधार

बैंकों को 25,000 करोड़ दिये जाएंगें ताकि वो 'बैड डेब्थ' के चंगुल से निकल सकें. लेकिन ये रकम बहुत थोड़ी थी. बजट के दो दिन बाद रिजर्व बैंक ने भी 40,000 करोड़ अपने खाते से बैंकों को दिये. शायद कुछ असर हो. लेकिन, गूढ़ विषय है कि आखिर, 'बैड डेब्थ' से कैसे निकला जाये? अगले वर्ष फिर से यही होगा. बैंकिंग क्षेत्र में राजनीतिक हस्तक्षेप कम कैसे हो इसपर कोई विचार करने की मंशा नहीं हैं. वैसे,  वित्त मंत्री ने कहा है कि 'डेब्थ रिक्वरी ट्रीब्युनल' बनाये जाएंगें. संबित जी क्लियर कर दूँ, ये मैं कांग्रेस के लिए भी कह रहा हूँ.

प्रधानमंत्री मुद्रा योजना से छोटे कारोबारियों को फायदा हुआ है और इस वर्ष टारगेट है 1,80,000 करोड़ खर्च करने का. अगले तीन वर्ष में बहुत सारे एटीएम और पोस्ट ऑफिस खोले जाएंगें. पोस्ट ऑफिस से याद आया जेएनयू वाले कार्यक्रम का नाम था - 'A country without Post Office'. और इसी बजट में इसको दूर करने की कोशिश की गई है.(ऑन ए लाइटर नोट, अब ये भी लिखना पड़ता है. पता नहीं अब कौन असहिष्णु हो जाएं!)

7. शासन और इज़ ऑफ डूइंग बिजनेस

व्यापारी सैनिक से बड़ा खतरा मोल लेता है ये मानना है हमारे प्रधानमंत्री का. शायद पहले था अब नहीं है, पता नहीं. हो सकता है अब भी हो. खैर,

सरकार जनता करीब हो इसके लिए बीच में आने वाली सभी बाधाओं को दूर किया जाएगा. सब्सिडी फायदों को आधार से जोड़ा जाएगा ताकि बिचौलियों की भूमिका खत्म हो. चीजों को पारदर्शी बना जाएगा. कंपनी बिल,2013 में जरूरी सुधार किये जाएंगें ताकि नये कारोबार लगाने में ज्यादा परेशानी ना हो. शायद, लिखना भूल गए- स्टार्ट अप के चक्कर में हम पर्यावरण नहीं खायेंगे इसपर ध्यान दिया जाएगा!

रामप्रवेस पूछ लिहीन -'त फिर आपही उपाय बताइये?' हम कहें -'देखिए, पहिले तो शोध पर पइसा मत काटिए. ग्रेजुएशन-एमए वाला सवाल करना सीखता है, पीएचडी-रिसर्चर लोग नया बात खोज समझ के लाता है. वही से उपाय भी आएगा. इधर मूवींग चेयर से खाली कमरा में गोल घूमिएगा. उ लोग बाहर मेहनत करता है. समझें?

'एक भारत श्रेष्ठ भारत' कार्यक्रम लॉंच होगा जो अलग-अलग भाषाओं, संस्कृतियों के लोगों को जोड़ेगा. इससे टूरिज्म़ का विकास होगा. याद आया, ये जो श्री श्री रविशंकर है, अभी विश्व सांस्कृतिक महोत्सव कराने के चक्कर में यमुना खादर का उपजाऊ जमीन तहस-नहस करने पर तुला है. ध्यान रखिये, ऐसा मत कीजिए. छोटे लोग हैं बोल ही सकते हैं. डरते भी हैं आजकल कब माँ भारती की भीड़ आवाज़ उठाने पर थूर दें!

8. राजकोषिय अनुपालन

सबसे बेहतरीन बात यही है कि राजकोषिय घाटा को इसबार जीडीपी के 3.5% पर रोक लिया जाएगा और दावा भी है कि विकास कार्यों से समझौता नहीं किया जाएगा. यही वो स्तंभ है जहाँ सामाजिक सुरक्षा वाला डिबेट खुलता है. हाँ, राजकोषिय घाटा नहीं बढ़ना चाहिए और सामाजिक सुरक्षा भी सुनिश्चित की जानी चाहिए. सरकार को सरोकार भी रखना है ना कि सिर्फ़ अकाउंट देखना है. अब दोनों बातें मैनेज करने के लिए उपाय ढूंढने चाहिए.

सातवें वेतन आयोग की सिफारिशें आ गई हैं. उसपर विचार किया जाएगा. पंडित दिन दयाल उपाध्याय और गुरू गोबिंद सिंह की जयंती मनाने को 100 करोड़ रूपये किनारे किये गए हैं. बजट भाषण के प्वाइंट 114 में लिखा है.

9. कर सुधार

छोटे टैक्स पेयर्स मने 5 लाख से नीचे सलाना आय वालों को टैक्स में 5000रूपये की छूट दी गई है. पहला घर खरीदने पर 60,000 रूपये की टैक्स छूट. आयकर स्लैब में कोई बदलाव नहीं किया गया. मीडिल क्लास निराश है. ज्यादा दुख इसलिए भी है कि पीएफ के 60% निकासी पर टैक्स लगा दिया गया. बहरहाल, इसे बदल जाने की पूरी उम्मीद है. संख्या में भले कम हो लेकिन सरकारों में पैठ बहुत रखता है मीडिल क्लास.

अगला झटका है सर्विस टैक्स पर 0.5% का कृषि कल्याण सेस लगा है जिससे टोटल सर्विस टैक्स हो गया 15%. रेल बजट में  किराया नहीं बढ़ाया गया जनता प्रभु-प्रभु जपने लगी. टैक्स इधर बढ़ाया और पीछे गली से रेल, हवाई जहाज, फिटनेस सेंटर, मोबाईल बिल, रेस्तरां सबकुछ मंहगा हो गया.

दिक्कत तो रामप्रवेश-सुगनी को हुआ है सबसे ज्यादा. गया में एक पिज्ज़ा हट खुला. अब प्रेम हैं फिल्मों से इलीटिस्ट प्रेम पढ़ाया जाता है तो रामप्रवेश भी पिज्जा हट चल जाते हैं. पहले ही टैक्स पर गरियाता है अब पाँच सौ के बिल पर पंद्रह पर्सेंट भरेंगें...दोस्त लोग समझाते हैं प्रेम खांटी प्रेम भी टिकाऊ होता है. दरअसल, और ऑरिजीनल ही होता है जहाँ महबूबा ऐसे कंफर्ट लेवल में हो कि सड़क किनारे छोले-कुलचे भी पिज्जा जैसे स्नेह से ही तोड़े. लेकिन प्रेम पर ज्यादा फिलॉस्पी धकेलना भी ठीक नहीं होता है, वो भी जब उसमें दोस्त इंवॉल्व हो!

वैसे लगाया भी है कृषि कल्याण सेस. आलोचना करने में भी थमना पड़ता हैं आखिर कृषि जो है. दिनभर मराठवाड़ा के किसानों की आत्महत्या पर RIP करते हैं तो थोड़ा योगदान देने में दिक्कत ही क्या? लेकिन फिर रेवेन्यू फॉरगोन वाला तर्क भी सही है. हर साल इतना छूट काहे?

अमीरों से थोड़ा खिंचा गया है. जैसे एक करोड़ से ज्यादा आय वालों को 15 फीसदी सर्चाज़ भी देना होगा. वहीं एक किस्म के अमीरों को बोनान्जा ऑफर भी दिया है सरकार ने. राहुल गाँधी के शब्दों में 'फेयर एंड लवली' स्किम. मतलब, सरकार मौका दे रही है कि आप कालेधन को सफेद कर लें. टोटल में 45% रूपया सरकार को दीजिए और पैसा हुआ सफेद! ना जाने कालाधन आंदोलन वाले रामदेव इसपर चुप काहे हैं. आंदोलन किया, आस्था चैनल पर भारत स्वाभिमान कार्यक्रम चलाया और अब अपने बुलंद किये मुद्दे पर खामोश! रामप्रवेश के हवाले से खबर है- रामदेव और आचार्य बालकृष्ण हजारीबाग के धनुआ-भनुआ जंगल में रंग बदलने की बूटी खोजने गए हैं! आते ही पंतजलि इसे लॉंच करेगी!

इन नौ स्तंभों में एक बार भी डिफेंस शब्द का जिक्र नहीं हुआ. लेकिन राष्ट्रवादी सरकार है. कन्हैया या उमर की बात करेंगें तो तर्क हनुमानथापा वाला मिलेगा. खैर, बता दें एक दशक के इतिहास में सबसे कम वृद्धि हुई है. अलबत्ता ज्यादा राशि ओआरओपी को दी गई है. लेकिन ध्यान रहें पेंशन राशि को मुख्य रक्षा बजट में नहीं जोड़ा जाता. टोटल बंदोबस्त किया गया है 2.58 करोड़. आधुनिकरण व हथियारों के खरीद के लिए इसमें है 90208 करोड़. जानकर बता रहे हैं ये राशि बेहद कम है. इसमें से बड़ी राशि वायु व जल सेना को विमान-जहाज खरीदने में जाने हैं. थल सेना का थोड़ा ज्यादा बुरा हाल है. सैन्य बलों का आधुनिकीकरण मुश्किल है फिल्हाल. मन करता सेना के साथ पटियाला हाउस कोर्ट वाले वकीलों को भी भेजा जाये. आधुनिकीकरण हो ना हो जोशिले कुछ कर गुजरने वाले लोग तो पहुंचेंगे.

महिलाओं, बच्चों, अल्पसंख्यकों के लिए ज्यादा कुछ तीर मार लेने लायक नहीं है. ICDS  का फंड काट लिया गया है. अल्पसंख्यक मामलों के मंत्रालय में भी मामूली वृद्धि है. निर्भया फंड जस का तस है.

ओवर ऑल देखें तो बजट अच्छा या बुरा कह पाना बहुत मुश्किल है. वैसे, सत्ता पक्ष इसे ऐतिहासिक और जनता के करीब बताता रहता है वहीं विपक्ष के लिए हमेशा ये उल्टा होता है. होना भी चाहिए क्योंकि तभी जनता बजट के फाडे-फाड को जान पाती है. हाँ, बजट कभी ऐसा हो भी नहीं सकता जो सबको संतुष्ट कर दें लेकिन कोशिश की जानी चाहिए की हासिये पर खड़ा व्यक्ति प्राथमिकता हो. नियत स्पष्ट हो. वरना, देश की जनता को तो चुनावी घोषणापत्रों से लेकर बजट तक में टोपी पहनाना कौन सी नई कला है! अरे, वैसे एक बात बताइए, सदन में महिषासुर कैसे आया जी? और दुर्गा चालीसा भी उधर पढ़ा जाता है क्या?

बजट होता है बहुत जटिल. वही समझिए इसकी खासियत भी है. अच्छी और बुरी दोनों. लेकिन हमारे जैसों के लिए इसकी जटिल भाषा बहुत परेशानदायी है. बजट हलवा वाली टीम से एक गुजारिश है, जरा सा इसको सरल में उदाहरण सहित लिखा कीजिए. जनता का करीब होने वाला बजट ऐसे में करीब नहीं दूर हो जाता है.
ओके?

लास्ट कमेंट- लैटेक्स पर भी इक्साज़्य ड्यूटी बढ़ गया माने कंडोम मंहगा हुआ. अब देखना दिलचस्प होगा जेएनयू पर मंहगें कंडोम से संख्या पर क्या असर पड़ता है. ज्ञानदेव जी लौंडों को इस वाले ज्ञान में भी रुचि है. और ये तो खैर मनाइए, वहाँ सुरक्षित यौन संबंध बनाये जा रहे हैं गर आपने ये डैटा प्रूभ कर दिया. यहाँ भी उनकी बौद्धिकता में उनके आगे आप टट्टू ही हैं. वरना मुँह से ये निकाला ही नहीं होता. बुलशिट!















Comments

  1. विस्तृत और witty बजट समीक्षा के लिए बहुत बहुत शुक्रिया रोहिन। दो तीन बातें मन को छू गयीं। एक तो ये की टीवी अखबार में अर्थशास्त्रियों, बाज़ार विश्लेषकों, बुद्धिजीवियों और एंकरों के अलावा भी तुम्हारे जैसे किसी नौजवान छात्र ने भी बजट समझाने समझने में इतनी मेहनत की और इतना रोचक बनाकर लिखा। और इस बात की ख़ुशी की प्लेटो गांधी पढ़ने वाले पॉलिटिकल साइंस के विद्यार्थी को dialogic form में कहने में इतना मज़ा आया की साक्षात् किसी रामप्रवेश से जैसे मिलना हो ही गया पाठकों का! इच्छा और उम्मीद दोनों हैं की समाज के बुनियादी सरोकारों पर तुम्हारा ये सटीक तार्किक और हमेशा ही दिलचस्प तरह से लिखना लिखाना हमारे जैसे पाठकों के लिए ऐसे ही बना रहेगा और संवरता रहेगा। शुभकामना यही तुम्हारे लिए की लिखने से तुम्हें आज जैसा लगाव हमेशा बना रहे चाहे प्रोफेशनली तुम राकेट वैज्ञानिक ही क्यों न बन जाओ!!!

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  2. विस्तृत और witty बजट समीक्षा के लिए बहुत बहुत शुक्रिया रोहिन। दो तीन बातें मन को छू गयीं। एक तो ये की टीवी अखबार में अर्थशास्त्रियों, बाज़ार विश्लेषकों, बुद्धिजीवियों और एंकरों के अलावा भी तुम्हारे जैसे किसी नौजवान छात्र ने भी बजट समझाने समझने में इतनी मेहनत की और इतना रोचक बनाकर लिखा। और इस बात की ख़ुशी की प्लेटो गांधी पढ़ने वाले पॉलिटिकल साइंस के विद्यार्थी को dialogic form में कहने में इतना मज़ा आया की साक्षात् किसी रामप्रवेश से जैसे मिलना हो ही गया पाठकों का! इच्छा और उम्मीद दोनों हैं की समाज के बुनियादी सरोकारों पर तुम्हारा ये सटीक तार्किक और हमेशा ही दिलचस्प तरह से लिखना लिखाना हमारे जैसे पाठकों के लिए ऐसे ही बना रहेगा और संवरता रहेगा। शुभकामना यही तुम्हारे लिए की लिखने से तुम्हें आज जैसा लगाव हमेशा बना रहे चाहे प्रोफेशनली तुम राकेट वैज्ञानिक ही क्यों न बन जाओ!!!

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