ये कैसा समझौता है?
बांगलादेश क्रिकेट टीम ने विश्व कप में शानदार प्रदर्शन करते हुए इंगलैड को हराकर चलता किया। इंगलैड बांगलादेश से हारकर श्रंखला से भी बाहर हो गया। यह जीत वाकई में बांगलादेश और उसकी क्रिकेट के लिए ऐतिहासिक दिन था। बांगलादेश ने पहली बार क्वाटर फाइनल में जगह बनाई और विश्व क्रिकेट में संघर्ष की कुव्वत पैदा करने का भी एहसास दिलाया।
एक तरफ महमुदुल्लाह का शतक दूसरी तरफ रुबेल की धारदार गेंदबाजी दोनों ने जीत में अहम भूमिका अदा की थी। ये वही रुबेल हुसैन जिनपर बांगलादेशी अभिनेत्री नजनीना अख्तर हैप्पी ने बालात्कार का आरोप लगाया था,अब रुबेल के अच्छे प्रदर्शन के बाद यह आरोप वापस ले रही हैं। इसी साल की शुरुआत में अभिनेत्री ने कहा था कि रूबेल ने अंतरंग संबंधों के दौरान शादी का वादा किया था जिससे वह पीछे हट गए। इन्हीं आरोपों की वजह से रुबेल के विश्व कप में हिस्सा लेने पर संकट पैदा हो गया था क्योंकि ढाका की अदालत ने उन्हें हिरासत में भेज दिया था। लेकिन राष्ट्रहित को देखते हुए उन्हें विश्व कप के अंत तक की जमानत दे दी गई और अब नजनीना अख्तर कह रही है-'मैंने उसे माफ किया।'
नजनीना अख्तर हैप्पी रुबेल और बांगलादेश के प्रदर्शन से 'हैप्पी' हो सकती हैं पर उन्हें अब कई सवालों के घेरे में हैं। क्या नजनीना का यह आरोप सिर्फ रूबेल को बदनाम करने के लिए था? क्या नजनीना ने चिढ और रुबेल के शादी के वादे से मुकरने पर बालात्कर का गंभीर आरोप लगाना उचित था? नजनीना की यह दरियादिली इंसाफ के लिए लड रही हजारों करोडों महिलाओं के संघर्ष को कमजोर करेगा।
क्या नजनीना अख्तर से यह पूछना उचित नहीं होगा कि-'महिला की अस्मत पहले या खिलाडी का शानदार प्रदर्शन?' क्या किसी रेप के आरोपी को महज इसलिए छोड दिया जाए क्योंकि वह प्रतिभाशाली है,क्योंकि उसने देश का नाम ऊंचा किया है? नजनीना के इस रवैये से दुनिया भर के मर्दों और पुरुषवादी समाज के बीच महिलाओं को कानून का बेजा इस्तेमाल करने का आरोप लगेगा। महिलाओं पर पहले ही आरोप लगते रहें हैं कि वो कानून का इस्तेमाल मर्दों से अपनी बात मनवाने या धमकाने या बदनाम करने के लिए करती हैं इस घटना के बाद यह भावना और बलवती होगी। नजनीना की माफी के बाद यह भी विमर्श का मुद्दा है कि कई महिलाओं ने मर्दों को झूठे बालात्कार के आरोप में फंसाया है। आरोपी भी अपनी प्रतिभा दिखाने का मौका मांगेगे ताकि माफी के लिए प्रतिभा आधार बन सके।
अगर नजनीना ने सही आरोप लगाए थे तो उन्हें मुकदमा वापस नहीं लेना चाहिए और अगर झूठे आरोप थे तो उनपर कानून के दुरोपयोग का मुकदमा चलाया जाए। भले ही नजनीना अख्तर ने अपनी अस्मत के साथ समझौता का मन बना लिया हो पर महिलाओं को इंसाफ मिले यह अलख जली रहनी चाहिए।
-रोहिण कुमार
दिल्ली विश्वविद्यालय
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