गजेंद्र चौहान के नाम खुला पत्र
माननीय महोदय,
पत्र में कुछ भी लिखने से पहले मैं अपना परिचय लिख देता हूँ,बस दो-चार लाइनों में ही। स्कूल में शॉट प्ले के लिए चुना गया लक्ष्मण का किरदार निभाया,छठ्ठी या सातवीं में 15 अगस्त के दिन ग्रुप सौंग,एक ग्रूप डांस और तीन बार ऐरोबिक्स। सन् 2003-4 में जिला स्तरीय डांस प्रतियोगिता में भी भाग लिया था ('कहो ना प्यार है' पर)। सारे सर्टिफिकेट और फोटो हैं मेरे पास। एसिड अटैक पर 'तेजाब' नाम की एक शॉट फिल्म भी की है जिसमें मेरा किरदार अहम है। उम्मीद है आपके सीवी से छोटी ही है मेरी सीवी,वैसे मैं तुलना नहीं कर रहा।
महोदय, पिछले करीब दो महीने से आपका नाम सुन रहा हूँ पर आज मेरे एक फेसबुक मित्र ने आपके एक फिल्म की तस्वीर साझा की तो मुझे आप खट्टाक से दिमाग में स्ट्राइक कर गए। वैसे,आपकी प्रख्यात कृति तो महाभारत में धर्मराज युधिष्ठिर की है पर वहाँ मेकअप,मुकुट,ज्वेलरी से सुसज्जित आर्टीफिसीयल चेहरे की चमक अब की आपकी सादगी से में मिलान नहीं कर पाया। माफ किजीएगा।
बचपन के उतरार्ध और लडकपन के पूर्वाध वाले कुछ दिनों में आपकी तो नहीं पर आपकी प्रख्यात टाइप फिल्में (टाइम्स अॉफ इंडिया के मुताबिक) कुछ फिल्में जरुर मेरे मित्रों ने देखीं होंगीं। मेरे मित्र प्रेम टॉकिज के अंदर बिताए वो पौने दो घंटें हर बार शेयर कर ही लेते थे। टिकट के लिए हिम्मत से लेकर चिपचिपे होते सीट तक सबकुछ बताते थे। महाभारत के धर्मवीर और वासना,खुली खिडकी के कर्मवीर। इसे कहतें हैं वर्सेटाइल एक्टर होना। कुछ-कुछ होता है फिल्म ने तो कुछ-कुछ करने को मजबूर नहीं किया पर प्रेम टॉकिज के मार्निंग शो में तो कुछ-कुछ करने से रोक लेना ही चुनौती होती थी उनके लिए। कैरेक्टर में क्या नायाब तरीके से खुद को ढालतें हैं आप। जबरदस्त! मेरे मित्र बंटी और सूरज को वैसे आपसे कुछ पूछना था,पर यहाँ खुले खत में नहीं खोल सकता।
महोदय, FTII में आपकी नियुक्ति पर मैं आपके साथ हूँ। FTII के लिए इससे सुखद और कुछ नहीं हो सकता। बच्चों के विरोध को मैं उनकी निदानी मात्र ही मानता हूँ,वो आपकी अहमियत आज नहीं समझ रहें पर FTII से बाहर की दुनिया में जैसे ही प्रवेश करेंगें उन्हें गजेंद्र चौहान जरुर याद आएंगें। फिल्म जगत में अपने पांव जमाना तो दूर की बात एक अच्छी फिल्म मिल जाना भी कितना मुश्किल है हमसब जानते हैं। आपके संघर्षशील जीवन से आज चेयरमैन तक का सफर किसी चमत्कार से कम नहीं।
विकीपिडिया से पता चला आपने कई फिल्में की हैं जिसमें कुछ ने तो बॉक्स अॉफिस पर धमाल की ही है घर-घर में अपनी एक खास जगह भी बना लीं है जिसे टीवी आज भी दिखाकर सेंटी और परिवारिक मूल्यों की अहमियत बनाए रखता है। पर उसमें आपका किरदार कितने देर का और कितना अहम है ये तो दर्शक भी बता देंगें। मुझे तो लगता है ये सरकार और संस्थान दोनों की दिव्यदृष्टि ही रही होगी जिसने आपकी कला को इस पद से नवाजा।
वैसे गजेंद्र जी, आप एक बेहद अच्छे कलाकार थे,हैं और रहेंगें पर जरा ठंडे दिमाग से सोचिएगा आपको जो जिम्मेदारी सौंपी गई है उस पद पर पहले गोपालकृष्णन,श्याम बेनेगल,गिरीश करनाड,अनंतमुर्थी,सइद मिर्जा जैसे महारथी पदासीन रहे हैं क्या आप इस लिस्ट में खुद को देखकर हिचकते नहीं? क्या आपका दिल आपसे कुछ नहीं पूछता?
छात्रों के साथ-साथ फिल्मी जगत के कलाकारों के आपके नियुक्ति पर हो रहे जबरदस्त विरोध से आपके दामन पर दाग तो लग ही गए हैं साथ ही छात्रों के नजरों में भी आपकी इज्जत धूमिल हुई है। गजेंद्र जी, जब इज्जत ही नहीं रहेगी तो सिर्फ कागजों पर हस्ताक्षर की किमत बनाए रखने से कितनों की नजर में उठ पाएंगें?
मुझे मालूम है आप स्मृति इरानी वाले उदाहरण की आड ले सकते हैं,जब वो वनवाईयूपी (वन इयर ग्रेजुएट प्रोग्राम) कर केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री बन सकतीं हैं तो फिर आपका तो सिर्फ FTII ही है। फिर आप यह भी कह सकते हैं 'काम से आंकिए डिग्री से नहीं'। महोदय,ये बिल्कुल ठीक बात है,जरूरी नहीं की कोई डिग्रीधारी ही अच्छा काम करे पर महोदय क्या यही व्यवस्था हमारे देश के बाकी दरबदर लोगों के लिए भी है? क्या कोई वनवाईयूपी या बारहवीं किए व्यक्ति सिर्फ अपनी कर्मठता के बदौलत चपरासी भी बन सकता है? क्या यही लाइन 'डिग्री नहीं काम देखिए' कहकर किसी भी नौजवान को नौकरी देंगें? नहीं न। यहाँ तो दिल्ली विश्वविद्यालय जैसी प्रिमीयर संस्थानों में नब्बे फीसदी अंक वालों को दाखिला तक नहीं मिल पाता फिर वो कर्मठता वाला तर्क अपच करता है। वर्षों से एडहॉक पर काम रहे शिक्षक डिग्री के साथ कर्मठता भी हर रोज साबित कर रहे हैं। पर, उनके हुनर की कद्र कौन करेगा? थोडा दिल इसलिए भी घबराता है क्योंकि एक वाइस चांसलर जो आज गवर्नर है वो गजब की कलाबाजी दिखा रहे हैं तो कही गर्वनर बनने के लिए कोई वाइस चांसलर एव टू का फोर करने लगा तब क्या होगा! किसी सिनीयर ने मजाक में ही कह दिया डीयू के राजनीति विज्ञान के हेड अॉफ डिपार्टमेंट अमीत शाह बनाए जा सकते हैं, जभी कलेजा तेज फडफडाने लगा।
चलिए,थोडे देर के लिए माना गजेंद्र चौहान कुर्सी पर बने रहे,आपके रिटायरमेंट के बाद पूनम पांडे को FTII का चेयरमैन बना दिया गया तो क्या आप ही उस लिस्ट में सहज महसूस करेंगें? आप समझ रहें हैं ,उम्मीद है।
महोदय सरकार तो इसे छात्रों और FTII के बीच का मुद्दा कहकर खेल से बाहर चले जाने का दावा ठोक रही हैं, इसे सच मान भी लेता हूँ तो यह स्थिती आपके मंथन के लिए और भी महत्वपूर्ण हो जाती है।
मेरी एक अहम चिंता यह भी है कि आपके चेयरमैन होते सरकार ने पोर्न बैन किया। माना आपने कभी पोर्न में ना ही धर्मवीर ना ही कर्मवीर का रोल प्ले किया पर अखबार वालों के मुताबिक आपने जिस तरह की ज्यादातर फिल्में की हैं वो भी सिसकियाँ मारने पर मजबूर तो कर ही देती होंगी। किरण,सुधा और प्रेम टॉकिज के मार्निंग शो में जो कामवाली,दूधवाली,कॉलेज गर्ल,रंगीन रातें टाइप भी पोर्न से कहाँ ज्यादा अलग होती हैं! बैन हटवाने के लिए आपने अपनी स्ट्रगलिंग दिनों के अनुभव जरुर सरकार से साझा किए होंगें तभी जल्दी ही बैन हटा भी और पोर्न बैन के खिलाफ मुखालफत करते लोगों को ना ही पाकिस्तान जाने का न्यौता दिया ना ही देशद्रोही कहा।
उम्मीद है महोदय, आप मेरी बातों पर विचार करेंगें और छात्र हित में खुद ही नेक कदम उठाकर बडप्पन के पात्र बनेंगें। आपके इस्तीफे से आप FTII के पूर्व चेयरमैन तो कहलाएंगें ही,फिल्मी दुनिया और छात्रों से वो सबकुछ मिल पाएगा जिसकी दरकार आपके फिल्मी करियर में बनी रही। धन्यवाद।
आपका शुभचिंतक
रोहिण कुमार
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