आईपीएल का ललित खेल: कहीं चियरलीडर्स भी तो फिक्स नहीं हैं न...

देश का धर्म क्रिकेट और महापर्व आईपीएल। जिस दिन से शुरु होता है बच्चे,बूढे सब सेट मैक्स में घुस जाते हैं। हर चौके छक्के पर चियरलीडर्स के साथ ही कमरिया ठुमकाते अपने टीम को चियर करते हुए। घर में ही भाई-बहन या मित्रों के बीच  अपने पसंदीदा टीम या खिलाडी पर दस रुपये से हजार तक के दांव लगाना तो आम ही है। भले ही घर के भीतर छोटे स्तर पर चल रहे इस सट्टे को अमूमन सट्टेबाजी की श्रेणी में ना डाला जाए पर है तो ये भी सट्टेबाजी ही!

जैसे हम और आप मजे के लिए ऐसे दांव खेल लेते हैं बिल्कुल वैसे ही मेंटर या खिलाडी भी  मजे लेने लगे हैं। बस,उनके और आपके मजे ने क्रिकेट के मजे ले लिए।

जस्टिस लोढा कमिटी का चेन्नई और राजस्थान पर बैन लगाने का फैसला सराहनीय तो जरूर है पर क्या इससे जड तक पहुंचा जा सकता है या सिर्फ पत्तों से धूल हटाने के बराबर है? जहाँ आज एक तरफ यह फैसला आया है वहीं दूसरी ओर भारत-जिम्बाबे के मैच में आईपीएल से उभरे सितारें केदार यादव (105) और मनीष पांडे (71) ने शानदार प्रदर्शन करते हुए भारत की डूबती नैय्या को बचाने को संघर्षत दिखे।

कब जेंटलमैंन्स गेम भांडपन के गोते लगाता हुए गंध देने लगा क्रिकेट प्रेमियों को इसकी टोह तक नहीं लगी। हर क्रिकेट खेलने वाला खिलाडी पहले भारत के लिए खेलने का सपना देखता है और साथ ही अब उसकी नजर आईपीएल पर होती है। विभिन्न देशों के टीम की लिमेटेड वैकेंसी को भरना का जरिया भी आईपीएल बना। यहाँ तक की क्रिकेटरों ने अपने देश के लिए खेलने से भी ज्यादा आईपीएल में खेलना पसंद किया। खेल,पैसा,गलैमर और अइय्यासी का पर्याय बनता गया तथाकथित महापर्व जिसमें धर्म (खेल: क्रिकेट) ही ड्रामा बन गया।

ट्राउजर में तौलिया लटकाने का मतलब गेंदबाज अगली बॉल नो बॉल फेंकेंगा ये संदेश धार्मिक सट्टोरियों को आसानी से मिल जाता पर हम और आप अपने मित्र से दांव खेलते रहते कि तौलिये से गेंद साईन करी है,पक्का गिल्ली गिरेगी! इस गंध से क्रिकेट प्रेमियों की महापर्व और धर्म से आस्था जरूर कम होगी।

श्रिनीवासन- मय्यपन ससुर दामाद की जोडी ने  आपीईल को आई-पील करने में शायद ही कोई कसर छोडी हो। राज कुंद्रा ने भी इसमें शिल्प ज्ञान लगाया। आईपीएल और ललित मोदी का रिश्ता कैसे भूलाया जा सकता है, इनका भी तो आईपीएल को आई-पील में बदलने में बडा योगदान है। जरा..ललित मोदी के बीते दिनों के ललित ट्वीट से मंत्री-नेताओं के आई-पील लिंक को आज के फैसले से जोडकर देखें। जहाँ तक देख पा रहे हों देंखें,बाकी तो ट्विट पर आजकल दिख ही जाता है।

बस,अब इतनी ही उम्मीद है बची है कि हमारी चहेती टीमें जिन्हें जीताने के लिए हमने अपने काम-धाम,पढाई-लिखाई सब में आग लगाई,उनकी जीत असली हो! कहीं चीयरलीडर्स भी तो फिक्स नहीं हैं न.............कहीं ऐसा तो नहीं उन्होंने भी किसी टीम के लिए ज्यादा-कम ठुमके लगा दिए!

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